परेशान आत्मा , मुझे मीट चाहिए , राजा की भटकती आत्मा जिसने बताया 1000 टन सोने का रहस्य , आत्मा ने किया मेरे बच्चे को जिंदा — हिंदी कहानी 2020

 परेशान आत्मा

हेल्लो 👨‍👨‍👦‍👦दोस्तों मैं😎 युवी आप 👨‍👨‍👧‍👧लोगो के लिए एक और ✍️कहानी ले के आया हूँ जो कि एक 😭परेशान 👻आत्मा की है! यह ✍️कहानी एक 🛣️गांव की है जिसका🅱️ नाम है कोलागढ़ कोलागढ़ का 🌳जंगल बहुत 👻भयानक है! उस जंगल मैं भूतों 👻प्रेतों का का ज्यादा डर था! वहां के 👨‍👨‍👧‍👧लोगो का मानना था कि आत्माए भूत- 👻प्रेत होते हैं!उन्होंने भी इस बात पर तब यकीन किया जब उन्होंने यह सब अपनी 👀आखों से देखा! उस गाँव मैं एक💃 औरत थी उसका🤔 दिमाग कुछ ठीक🔪 नहीं था उसका 🤵पति भी एक एक्सीडेंटमैं 🔪मर गया था तब से वह कुछ अजीब सी हो गयी थी कुछ लोग उसे 😵पागल कहते थे!एक बार की बात थी की 🌈सुबह-सुबह गांव का एक 🤵आदमी जिसका नाम भोला राम था! वह 🛣️शहर की और कुछ ज़रूरी काम से निकल पड़ा गांव के आने जाने का एक ही 🛣️रास्ता था वह भी 🌳जंगल से गुजरता था!इसलिए लोग उसमें अँधेरे मैं डर के मारे नहीं जाते थे और 🌃शाम होते ही कोई🌳 जंगल की तरफ नहीं जाता था!भोला राम जब उस जंगल से जा रहा था गांव से कुछ दूर ही जंगल मैं उसे एक 💃औरत की 🔪लाश 🌳पेड़ पर लटकती👀 नज़र आई वह एक दम👻 डर गया और 🏃भागता हुआ🛣️ गांव वापस आया! कुछ👨‍👨‍👧‍👧 लोगो ने उसे इस तरह से भागते देख कहा क्या हुआ भोला राम तुम तो अभी🛣️ शहर के लिए निकले थे और तुम भागते हुए वापस क्योँ आ गए!

 तब भोला राम ने बताया कि मैंने अभी किसी की🔪 लाश को 🌳पेड़ पर लटकते👀 देखा वह लाश किसी 💃औरत की है! देखते-👀देखते👨‍👨‍👧‍👧 सारा गांव👨‍👨‍👧‍👧 इकट्ठा हो गया कि क्या हो गया कहाँ है🔪 लाश चलो चलकर👀 देखते हैं! तब सारा गांव उसे 😎देखने को चल दिया देखते क्या हैं कि एक औरत की लाश पेड़ पर लटक रही है! देखते ही गांव वालों ने कहा कि यह तो पागल लग रही है!कुछ लोगों ने कहा इसे नीचे उतारो और इसका दाह संस्कार कर दो कुछ लोगो ने कहा छोड़ो इसका है ही कौन जो इसे आग देगा वेसे भी इससे सारा गांव परेशान हो गया था चलो इससे तो पीछा छूटा! कुछ बूढ़े लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं कहते शरीर का दाह संस्कार करना ज़रूरी होता हे नहीं तो उसकी आत्मा भटकती रहती है! तो कुछ लोगों ने कहा कि तो जा कर उतार ले उसे और करदे दाह संस्कार बड़े आये सुझाव देने वाले वेसे भी इस जंगल मैं आत्माओ की कमी नहीं है और एक और आत्मा सही चलो धीरे धीरे सारे लोग चलते बने दोस्तों आठ दस दिन तक वह लाश ऐसे ही पेड़ पर लटकती रही किसी ने उसे उतारा तक नहीं !एक दिन अचानक उस लाश की रस्सी टूटकर पेड़ों पर अटक गयी और पत्तो से छुप गयी!समय बीतता गया एक दिन गाँव का हरिया नाम का व्यक्ति उस राते से जा रहा था कि उसे वही पागल सामने दिखाई दी वह एक दम डर गया उसका सारा शरीर कांपने लगा और उसके पलक झपकते ही वह गायब हो गयी हरिये ने सोचा कि मैं तो मन मैं ऐसे ही सोच रहा था! और वह आगे चल दिया तभी एक दम उसकी और एक सांड दोड़ते हुए आया और उसे जोर से टक्कर मार के चला गया हरिया उल्टा गिरा उसके बहुत जोर से चोट आई उसने जैसे ही पीछे मुड के देखा तो कोई नहीं उसने जैसे ही फिर आगे को देखा तो उसके आगे एक औरत कड़ी हो गयी वह एक दम डर गया और कांपने लगा 




उसकी😎 शक्ल तो ऐसी थी कि तरफ गाल की हड्डियाँ और एक तरफ जला हुआ सा 😎चेहरा 👀आंखें अन्दर धंसी हुई नाख़ून बड़े बड़े वह उसे👀 देखकर ऐसा👻 डरा कि वह बेहोश होके गिर पड़ा उसकी👀 आंखें खुली तो वह एक दम 👻डर गया उसने अपने आप को घने 🌳जंगलों के बीचो बीच पाया उसके पेट मैं तो पानी हो गया चरों तरफ से 👂आवाजें आ रही थी कहीं 🌿पत्तों मैं खर खर की🗣️ आवाजें तो कहीं🦁 शेर के धहड़ने की 🗣️आवाजें वह इतना डर हुआ था कि उसे तो🏃 भागना ही 🤸नहीं आ रहा था वह वहां से धीरे🐇 धीरे डरता हुआ🌳 जंगल मैं से भटकता हुआ बाहर आया उसे🌳 जंगल से निकलते-निकलते👻 अँधेरा हो गया था वो अब और 👻डर रहा था कि पहले तो एक👻 भूत था पर अब ना जाने कितनो से पला पड़ेगा पता नहीं आज मैं यहाँ से जिन्दा निकलूंगा कि नहीं उसके मन मैं अजीब अजीब से 🤔ख्याल आ रहे थे वह 🏃भागता ही चला जा रहा था भागते🏃 भागते वो जाने कैसे उस🌳 जंगल से बाहर निकल के आया उसे इस हालत मैं👀 देख कुछ 👨‍👨‍👧‍👧लोगो ने उससे पुछा कि इतनी रात को कहाँ से आ रहे हो तुम्हें डर नही लगता क्या उसने कुछ भी जवाब नहीं दिया उसे विश्वाश 🤔नहीं हो रहा था कि मैं गांव मैं जिन्दा आ गया हूँ उसकी हालत😎 देखकर 🗣️कह रहे थे कि इस हरिया को🤔 क्या हो गया है!वह 🏡घर पहुंचा और जाकर कि ओढ़ कर😴 सो गया उसकी 💃औरत ने उसे खाना खाने के लिए कहा पर उसने कुछ जवाब नहीं दिया! उसने रत को एक सपना देखा और उस सपने मैं उसी परेशान आत्मा को देखा वह उससे रो रो कर कह रही थी मुझे बचालो मुझे इस नरक से बचा लो यह लोग मुझे मार डालेंगे ऐसा😴 सपना देख कर वह उठ खड़ा हुआ उसके पशीना निकल आया था और वह यह सोच रहा था कि यह सब मेरे साथ क्योँ हो रहा है! 

🌈सुबह हो गयी लेकिन हरिया🤔 नहीं जगा तब उसकी पत्नी ने उसे जगाने के हाथ लगाया तो उसे उसके चहरे मैं उसी का चहरा दिखा वह चिल्ला पड़ा तब उसकी ने कहा क्या हुआ तुम शाम से कुछ अजीब से डरे हुए लग रहे हो न शाम को खाना खाया तुम्हें आखिर हुआ क्या है! मुझे बताओ तब उसने सारी बात बतायी ! तब वह जा कर समझी कि आप तभी परेशान हो!धीरे-धीरे यह बात सारी गांव मैं फेल गयी कि वह पागल औरत भूत बन गयी है! तभी कुछ लोगों ने बताया कि रात को यही आवाज कुछ लोगो ने सुनी जो जंगल से आ रही थी कि मुझे बचाओ मुझे इस नरक से निकालो अब तो सारे लोग परेशान थे कि शहर का जाने का रास्ता भी बंद हो गया अब हम लोग क्या करैं !तब कुछ लोगों ने कहा कि हम लोगों को किसी महान आदमी की सलाह लेनी होगी कि यह सब मांजरा क्या है!

तब किसी एक आदमी ने कहा कि पास के गांव मैं नत्थीलाल भगत जी रहते हैं! वह आत्माओं के बारे मैं बहुत कुछ जानते हैं!जब सुखिया के लड़के को एक आत्मा ने पकड़ लिया था तब उन्ही ने उस आत्मा से उसे छुड़ाया था!तब कुछ लोगों ने कहा यही ठीक रहेगा! सब लोगों ने उस भगत जी को गांव मैं बुलाया और उन्हें साड़ी घटना बता दी भगत जी ने कहा कि तुमने उसके शरीर को न जला कर बहुत बड़ी गलती कर दी चाहे वो कैसी भी थी इतना बड़ा जंगल हो के भी तुम लोगों से चार लकड़ियों का बंदोबस्त नहीं हो पाया था! इन्शान कैसा भी हो जब वह मर जाता है तो उसका दुश्मन भी उसकी अर्थी को कन्धा देने को आ ही जाता है! पर तुमने तो सारी सीमायें तोड़ दी चलो अब जो भी हो गया है उससे निपटने के लिए अब तैयारी करो! तब भगत जी ने हवन किया और अपना ध्यान लगा के देखा तो उसे वह आत्मा बंधी हुई नज़र आई तब पंडित जी ने उसे पुछा कि तुम्हें यहाँ किसने बांध रखा है तब उसने कहा कि मुझे एक दरिन्दे ने बाँध रखा है पहले उसने मुझे मार के पेड़ पर लटका दिया था!फिर गांव वालों ने मेरे शरीर का अंतिम संस्कार भी नहीं किया! मेरे शरीर को उसने कहीं छुपा के रख दिया है इसने मेरी आत्मा को कैद कर लिया है!जब तक मुझे मुक्ति नहीं मिलेगी

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 इसे यह मेरी है इसे मैंने वर्षों से सजा के रखा है उसने गुस्से मैं सारा पैड झकझोर दिया ऐसा होते देख पंडित जी ने मंत्र पढना शुरू किया पंडित जी को मंत्र पढ़ते देख उसने उन पर हमला बोल दिया पंडित जी को उठा कर फेंक दिया पर पंडित जी के मंत्र बंद नहीं हुए उन्होंने जो मंत्र पढ़ पढ़ के उसके ऊपर मिटटी फेंकी उसके शरीर पर जहाँ जहाँ मिटटी पड़ी उसका शरीर वहीँ से गलता जा रहा था उसका एक हाथ टूट कर गिरा वह पंडित जी के ऊपर ऐसा झपटा पंडित जी उस जगह से हट गए और वह नीचे जा गिरा पंडित जी ने फिर मंत्र पढ़ के उसके शरीर पर मारा वह वहीँ ढेर हो गया! उसकी आत्मा निकल के एक गांव वाले के अन्दर घुश गयी उसने गांव वालों को ही मारना शुरू कर दिया उसने तो एक का शिर फाड़ दिया और एक का हाथ चबा गया इतना खतरनाक होता जा रहा था उधर शाम होती जा रही थी तब पंडित जी ने उसकी और रस्सी फेंकीऔर दूसरी और एक आदमी ने पकड़ के उसे एक पेड़ से बांध दिया और उसको दो चार मंत्र पढ़ के मारे और लोगों से कहा शाम होने वाली है इससे पहले यहाँ और आत्माएं आये पहले उस शव को नीचे उतारो और उसका अंतिम संस्कार कर दो तब कुछ लोगों ने उसे उसे उठाकर लकड़ियों पर लिटा करा आग लगा दी वह पेड़ से बंधा हुआ चिल्लाए जा रहा था मत जलाओ उसे मत जलाओ उसे देखते देखते वह हड्डियाँ राख मैं परवर्तित हो गयी
 उसमें से एक ज्वाला उठती उई बाहर आई और पंडित जी को नमस्कार किया और कहा कि अगर इसको मारना हे तो उसके पहले वाले शरीर को जला दो तब वह खुद उसके शरीर से निकल जाएगा ऐसा कहते हुए वह आग का गोला बनकर आकश कि ओर चली गयी तब पंडित जी ने देर न करते हुए उसके शरीर को भी जला दिया तब वह फिर चिल्लाया मुझे मत जलाओ मुझे मत जलाओ तब तक आग उसके शरीर को जला चुकी थी!ओर उसकी आत्मा उस गांव वाले के शरीर से निकल कर आकाश मैं चली गयी तब उस आदमी को रस्सी से छोड़ दिया! तब उसका शरीर होश मैं आया! तब सब लोग उसे लेकर गांव आये तब सबने भगत जी को राम-राम कहा ओर भगत जी अपने गांव चले गए तब से उस गांव शांति आ गयी!

 इससे जब तक मेरे शरीर का अंतिम संस्कार नहीं हो जाता मैंने हरिया को भी यह बात बतानी चाही जब तक मैं उसे कुछ बताती पर उससे पहले उस वहसी दरिन्दे ने उसे चोट पहुंचा कर बेहोश कर दिया था तब मैंने उसे उससे बचा लिया था!तब पंडित जी सब समझ गए और कहा कि तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें अवश्य मुक्ति दिलाऊँगा! तब भगत जी ने आखें खोली तब उन्होंने कहा चलो मुझे उस पेड़ के पास ले चलो जहाँ वह मरी थी! पंडित जी ने कहा की जिस तरीके से अंतिम संस्कार करते है वह सारा सामान ले चलो तब गांव वाले सारा सामान लेकर चल दिए पंडित जी आगे आगे और गांव वाले पीछे-पीछे उन्होंने देखा की वह पेड़ तो बहुत बड़ा हो गया है वह बहुत घना हो गया है और लाश का कुछ भी अता पता नहीं है! न हीं उसकी हड्डियों का तब पंडित जी ने कहा की सारे लोग ऊपर चढ़ के ढूँढो हमें यह काम शाम होने से पहले करना है! तब सारे लोग उस पेड़ पर चढ़ कर उस लाश को ढूँढने लगे बहुत देर तक वह लाश नहीं मिली सारे लोग सोचने लगे लाश गयी तो गयी कहाँ न हड्डियों क पता कहा गयी एक भी हड्डी नहीं मिली तब पंडित जी ने नीबू दे दिया सबको और कहा जहाँ यह नीबू लाल हो जाये समझना वहीँ पर लाश है!दो तीन मिनट बाद एक आदमी ने कहा यह रही लाश यह तो हड्डियों का ढांचा है! उसका इतना कहते ही सारे लोग चीखने लगे भूत भूत उनके सामने एक भयानक आदमी खड़ा है उसके यह बड़े-बड़े दांत आंखें लाल-लाल मुंह भेडिये जैसा ये बड़े नाखून लोग डर के मारे ऊपर से कूद गए एक को तो उस भेडिये ने ऐसा पकड़ के फेंका की वह सीधा नीचे आ के गिरा हा हा हा हा चिल्लाने लगा कोई नहीं ले जाएगा

मुझे मीट चाहिए
 
मेरे मामाजी की लड़की की शादी थी ! शादी गाँव में थी! एक दिन पहले गाने बजाने का माहौल चल रहा था ! मेरे भाई (मामा के लड़के) के कुछ दोस्त भी आ रखे थे! उनकी पड़ोस के घर की छत्त पर पीने पिलाने की दावत चल रही थी ! भाई ने मुझे पैसे दिए और अपने एक दोस्त के साथ मीट लेने भेज दिया! मामा के घर पर मासाहारी खाने की मनाही है इसलिये हमे ये काम चुपके से करना था ! हम दोनों बाइक पर सवार होकर निकल पड़े!सड़क बिलकुल सुनसान थी व बाइक की लाइट के अलावा कोई रोशिनी नहीं थी! वापस आते समय घर से करीब एक किलोमीटर पहले हमारी बाइक रुक गई! काफी कोशिश करने पर भी चालू नहीं हुई! हम खींच कर बाइक ले जाने लगे! कुछ ही दूरी पर हमे एक बूढा आदमी दिखा ! वह हमारे पास आया और कहने लगा थोड़ा मीट दे दो ! हमे पहले से ही गुस्सा आ रहा था, उसकी बात सुन कर और गुस्सा आने लगा ! भाई के दोस्त ने चिड़ कर कहा – ” तेरे बाप ने खाया है कभी मीट? चल भाग यहाँ से!” आदमी ने फिर से मीट माँगा मगर हमने उसे धमका कर भगा दिया ! घर पहुँच कर मैंने भाई को मीट पकड़ा दिया और नाच गाने वाले कमरे में चला गया ! वहां जाकर देखा तो नाच गाना बंद हो गया था! सब लोग दीदी (दुल्हन) को घेर कर खडे थे! दीदी अजीब सी हरकतें कर रही थी और कह रही थी -” मुझे मीट खाना है!” दीदी ने ज़िन्दगी में कभी भी मीट नहीं खाया था! सब को समझ आ रहा था कि ये भूत प्रेत का चक्कर है ! मामा ने दीदी को जोर के दो थप्पड़ मारे! दीदी ठीक हो गई! मगर मामी अजीब सी हरकतें करने लगी! ये सिलसिला चलता रहा ! भूत एक को छोडता तो दूसरे पर लग जाता! सब भूत को समझाने लगे कि इस घर के लोग मॉस मछली छूते तक नहीं है! पर भूत ने बताया कि इस घर के कुछ लोगों ने मीट मंगाया है और मेरे मांगने पर मुझे नहीं दिया !ये सुन कर कुछ कुछ बात मेरे समझ में आने लगी! मै भाग कर भाई के पास गया और घर और रास्ते पर हुई घटना के बारे मे बताया ! भाई ने वहां से मीट का एक टुकड़ा उठाया और चल दिया! उस समय भूत दीदी पर लगा हुआ था! भाई ने मीट का टुकड़ा दीदी के मुह मे डाल दिया , तब जाकर दीदी शांत हुई! थोड़ी देर बाद सब सामान्य हो गया और सब अपने अपने काम मे लगगए ! मगर मामा थोड़े गुस्से मे लग रहे थे! शायद वह भाई पर गुस्सा थे !

राजा की भटकती आत्मा जिसने बताया 1000 टन सोने का रहस्य

आज जो मै आपको बताने जा रहा हु वो कोई कहानी या किस्सा नहीं बल्कि हकीकत है जो उस देश की सच्ची घटना है जिसे कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था | लेकिन ब्रिटिश सरकार सारा सोना भारत से लुटकर ले गये | लेकिन अभी भी भारत के कई हिस्सों में प्राचीन समय के लोगो के द्वारा गडा हुआ बहुत सा धन है जिसे वो चोरी हो जाने के डर से जमीन में गाड़ देते थे | और उनकी मौत के बाद वो सोना चांदी बस धरती के गर्भ में ही रह जाता है | ऐसा ही एक घटना आजकल यूपी के उन्नाव जिले के डौंडिया खेड़ा गांव में हो रही है जहा के एक साधू शोभन सरकार को वहा के राजा राम बक्ष की आत्मा ने उनको जमीन में गडा 1000 टन सोने का रहस्य बताया जो आज के सोने के रेट के हिसाब से इसकी कीमत आंकें तो 29 खरब रुपये के लगभग बैठती है. | कौन थे राजा राम बक्ष ? कहा से आया सोना ? कैसे मौत हुई राजा की ? आइये इन सारे पहलुओ पर प्रकाश डाले इतिहासकार चंद्रकांत तिवारी के अनुसार , क्रांतिकारी शूरवीर राजा ने सन् 1857 की क्रान्ति के दौरान अंग्रेजों के छक्के छुडा दिए थे। वह कौन थे और कब से वह इस किले में रह रहे थे ये किसी को स्पष्ट मालूम नहीं है।यहां के इतिहासकारों की माने तो 2 जून 1857 की क्रान्ति में डिलेश्वर मंदिर में छिपे बारह अंग्रेज को जिन्दा जला दिया था। इसमें जनरल डीलाफौस भी मौजूद थे। कहा जाता है कि राजा चंडिका देवी के बहुत बड़े भक्त थे। वह रोजाना सुबह मां चंडिका का दर्शन करने के बाद ही सिंघासन पर बैठते थे।लोगों के अनुसार राजा राव राम बक्स सिंह पूजा करने के बाद अपने गले में एक गेंदे के फूल की माला जरुर पहनते थे। यही वजह है कि जब अंग्रेजो ने उनको अंग्रेजो को जिन्दा जलाने की सजा के रूप में फांसी की सजा सुनाई गयी, और उनको फांसी पर लटकाई गयी तो उन्हें कुछ नहीं हुआ। इस तरह तीन बार उनको फांसी दी गयी मगर राजा को कुछ नहीं हुआ।तब राजा राव राम बक्स सिंह ने अपने गले में पड़े फूल की माला को उतार कर फेंका और गंगा से अपनी आगोश में लेने की प्रार्थना की। उसके बाद जब अंग्रेजो ने उनको फांसी पर लटकाया तब उनके प्राण शारीर से निकला था।

ढौंडिया खेड़ा के बुजुर्गों का क‍हना है कि यह खजाना बड़ा तिलिस्‍मी है। 18 तारीख से सोने की खोज शुरू करने वाली ‘एएसआई’ की स्‍टडी भी इस बात की तस्‍दीक करती है कि खजाने को हासिल करना बहुत टेढ़ा काम है। अध्‍ययन के अनुसार , ढौंडिया खेड़ा के प्रतापी राजा राम बक्‍श के जिस किले में सोने का खजाना दबा होने की बात कही है उस किले को तिलक चंडी राजपूत ने 17वीं शताब्‍दी के दौरान बनाया था।

ओमजी तर्क देते हैं कि भले ही राजा को फांसी हुए 150 साल से अधिक हो चुके हों लेकिन पांच साल पहले तक गांव के बच्चों तक ने राजा साहब को सफेद घोड़े पर चार-पांच सैनिकों के साथ मंदिर आते और किले की रक्षा करते देखा है। ग्राम प्रधान अजयपाल सिंह भी हां में हां मिलाते हुए कहते हैं कि उस इलाके में घोड़े की छाप और मंदिर में किसी के रोज पूजा करने के निशान अब भी दिखते हैं। हालांकि ख्वाबों के खजानों का यह दावा अब भी विशेषज्ञों को हैरत में डाले है।

ऐसा माना जाता है कि ताल्‍लुकदार ने पहले खजाना दबाया और फिर किले का निर्माण किया। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाली कई रियासतों के राजाओं ने राजा राम बक्‍श के किले को सुरक्षित मानते हुए अपना खजाना वहां पर दबाव दिया था। एसआई व भूगर्भ वैज्ञानिकों की जांच के मुताबिक, किले में 15 फुट नीचे खजाना मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसमें दबे सोने की कीमत करीब तीन लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।

स्वामी ओम के मुताबिक राजा राव बख्श सिंह सपने में नहीं आए थे, बल्कि साक्षात प्रकट हुए थे|तभी उन्होंने सरकार से सोना निकलवाने की बात कही थी|मरा हुआ राजा घोड़े पर घूमता था ओम स्वामी के अनुसार दिवंगत राजा राव बख्श पांच साल पहले तक इस इलाके में घोड़े पर सवार होकर घूमा करते थे|वे किले के आस पास घूमा करते थे| उन्हें इस इलाके के कई लोगों ने देखा है|स्वामी के मुताबिक गांव दौड़िया खेड़ा का बच्चा-बच्चा आपको इसके बारे में बताएगा|

गांव के ही एक और बुजुर्ग आदमी सीताराम ने बताया कि जब उनकी उम्र दस साल की थी, तक एक बार सरकार ने यहां खुदाई करवाना चाहा था। इसके लिए करीब एक दर्जन के आसपास मजदूर भी लगाए गए थे। मगर कहते हैं कि जैसे ही मजदूरों ने इस किले में खुदाई आरम्भ की उसी समय वहां कई सांपों ने मजदूरों पर हमला बोल दिया था। इसमें दो मजदूर की मौत भी हो गयी थी। इसके बाद से वहां खजाने को लेकर कोई खुदाई नहीं की गयी।

पुरातत्व विभाग की टीम ने 12 अक्टूबर से कैंप लगा कर सफाई का काम शुरू कर दिया है। 18 अक्टूबर से स्वर्ण भंडार की खुदाई का काम शुरू हो गया है। उन्नाव के पुरवा क्षेत्र के एक ही परिवार के चार लोग राजा के वारिस होने की बात कह रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से स्वर्ण भण्डार में अपना हक लेने की बात कही है। साथ ही राजा के किले में कुछ ज़मीन पर अपना घर बनवाने की बात कही है।

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आत्मा ने किया मेरे बच्चे को जिंदा

यह घटना सन 1958 में घटित हुई थी | उस समय में चिकित्सा सुविधा बहुत ही कमजोर हुआ करती थी | यूपी के मुज्जफरनगर के रसूलपुर गाँव में एक चौधरी गिरधरसिंह नाम का एक आदमी रहा करता था | उसके एक तीन साल का बच्चा था | उसे चेचक हो गया और काफी इलाज करने के बाद भी वो जिन्दा नहीं बच सका | रात में उसकी मौत होने से सुबह उसके अंतिम संस्कार करने का निर्णय किया |

उसी रात को मुज्जफरनगर के एक दुसरे गाँव में शोभाराम नाम के एक आदमी की बैलगाड़ी के पहिये के नीचे आ जाने से मौत हो गयी | उसको अस्पताल ले जाते वक़्त रास्ते में ही उसकी मौत हो गयी |मृतक के घरवालो ने उसका दाह संस्कार कर दिया |

दुसरी तरफ जब रसूलपुर में उस मृत बच्चे को दफन करने के लिए जंगल जाने लगे | अचानक रास्ते में उसके शरीर में हलचल हुई और वो उठकर खड़ा हो गया | लोग ये देखकर दंग रह गए | लेकिन बाद में उसको जिन्दा देखकर सभी खुश हो गए | लेकिन लोगो को ये पता नहीं था कि उस बच्चे के शरीर को किसी और की आत्मा ने जकड़ रखा था | उस तीन साल के बच्चे में 23 साल के शोभाराम की आत्मा घुस चुकी थी | वो अलग जगह पर आकर बहुत परेशान हो रहा था और खाना खाने से मना कर रहा था लेकिन बड़ी मुश्किल से समझाकर उसको खाने के लिए राजी किया |

एक दिन वो👶 बच्चा अपनी माँ के साथ उसके ननिहाल जा रहा था कि अचानक रास्ते में वो जगह आयी जहा शोभाराम की मौत हुई थी | उस बच्चे ने इशारा करके बताया कि ये रास्ता उसके गाँव की और जाता है उसकी माँ उसकी बातों को अनसुना कर उसके ननिहाल चली गयी | उसके ननिहाल में आत्माराम के गाँव का एक आदमी जगन्नाथ किसी काम से आया | आत्माराम की आत्मा ने उसको पहचान कर उसे आवाज़ लगाई | जगन्नाथ को बच्चे के मुह से अपना नाम सुनकर अचम्भा हुआ | जगन्नाथ के पूछने पर उस बच्चे ने उसका पूरा इतिहास बता दिया और बोला कि मेरी मौत से पहले ही तुम लोगो ने मुझे जला दिया और इस बच्चे के खाली शरीर को देखकर इसमें रहने लग गया

जब जगन्नाथ ने ये बात अपने 🏡गाँव में बताई तो उसके पुरे परिवार के आत्माराम से मिलने चल दिए | उस बच्चे ने सबको पहचान लिया और वो उनके साथ उसके गाँव चल दिया | और उसने वापस रसलपुर आने से मना कर दिया लेकिन लोगो के समझाने पर मान गया | इस तरह वो2️⃣ दो 👨‍👨‍👧परिवारों को साथ लेकर🏃 चलता रहा |

इस कहानी से हमे ये पता चलता कि यदि कम 🔞उम्र में किसी की🔪 मौत हो जाती है तो वो अपनी अधूरी इच्छाओ को पूरा करने के लिए किसी के 💃शरीर को इसका जरिया बना सकती है |👨‍👨‍👧‍👧 दोस्तों मै आपको बताना चाहता हु कि ये तो केवल कहानी है लेकिन हकीकत में ऐसे कुछ मामले होते है जिनको कोई 🆔पहचान नहीं पाता है | इस 📚कहानी में आपको थोड़ी सी भी सच्चाई लगे तो 📧कमेंट के जरिये अपना विचार लिखना ना भूले

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